दीप पूजन
दीपक का महत्त्व, नित्य पूजन, कार्तिक दीपदान एवं लक्षवर्तिका व्रत-विधि
माँ गंगा का माहात्म्य, सम्पूर्ण पूजन-विधि, स्तोत्र एवं आरती
गंगा-तट पर हों या घर में गंगाजल के कलश के सम्मुख — पवित्रीकरण से विसर्जन तक माँ गंगा का पूरा पूजन, शुद्ध मंत्र और सरल अर्थ सहित, एक ही पुस्तक में।
लेखक श्री शिवबोध जी · प्रकाशक ShivBodh Trust

हिमालय की बर्फीली चोटियों से उतरकर सागर में मिलने तक गंगा की जो अविरल धारा बहती है, वह भारत के लोक-मन के लिए केवल एक नदी नहीं है। वह जीवन है, आस्था है और मोक्ष का द्वार है। जन्म के संस्कार से लेकर अंतिम यात्रा तक गंगाजल साथ रहता है।
सामान्य श्रद्धालु के पास ऐसी कोई सरल और क्रमबद्ध पुस्तिका नहीं थी, जिसमें गंगा-पूजन की पूरी विधि शुद्ध मंत्रों और सरल अर्थ के साथ एक ही स्थान पर मिल जाए। यह पुस्तक वही कमी पूरी करती है। इस द्वितीय संस्करण में सभी पौराणिक श्लोक स्कन्दपुराण, विष्णुपुराण, मत्स्यपुराण, नारदपुराण और ब्रह्मवैवर्तपुराण से मिलाकर शुद्ध किए गए हैं, और गंगा दशहरा का अध्याय नया जोड़ा गया है।
पूजन से पहले माँ गंगा को जानें — अवतरण की कथा और शास्त्रों के चुने हुए श्लोक।
त्रिपथगा और विष्णुपदी, राजा सगर और भगीरथ की तपस्या, गंगावतरण का संदेश और वेद-पुराणों के श्लोक।
पवित्रीकरण से विसर्जन तक — हर मंत्र के साथ उसका अर्थ, ताकि मंत्र बोलते समय मन भी उसके भाव में रहे।
पवित्रीकरण, आचमन, आसन-शुद्धि, दीप-प्रज्वलन, शंख-घण्टा पूजन, स्वस्तिवाचन और संकल्प।
ध्यान और आवाहन से आरती और प्रार्थना तक — षोडशोपचार विधि।
भूमि-पूजन, धान्य-स्थापन, कलश में द्रव्य, वरुण और तीर्थों का आवाहन।
ध्यान, आवाहन, स्नान, अङ्ग-पूजा, नैवेद्य, आरती, मन्त्र-पुष्पाञ्जलि, क्षमा-प्रार्थना और विसर्जन।
माँ गंगा के 108 नाम और श्री गंगा जी की आरती।
ब्रह्मवैवर्तपुराण का गंगा-ध्यान और विष्णुपदी-स्तोत्र, आदि शंकराचार्य का गंगास्तोत्र, तुलसीदास जी का गंगा-पद — अर्थ सहित।
स्कन्दपुराण के अनुसार दशहरा की शास्त्रीय विधि, दशहरा-स्तोत्र और आज के समय में इसे कैसे मनाएँ।
पूजन-सामग्री की एकत्र सूची, घर के लिए एक-पृष्ठीय संक्षिप्त गंगा-पूजन और गंगा से जुड़े प्रमुख पर्व।
पुस्तक में प्रयुक्त पुराणों, वेद-संहिताओं और स्रोतों की सूची।
माँ गंगा की कृपा से यह छोटा-सा प्रयास आपके घर और मन तक पहुँचे, और उनकी निर्मलता हम सबके जीवन में बहती रहे।
भूमिका, अनुक्रमणिका, मंगलाचरण और पूरा अध्याय 1 — 20 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना (PDF)।
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इस पुस्तक के लेखक
वह संस्था जिसके माध्यम से यह पुस्तक ई-पुस्तक के रूप में उपलब्ध है
इस पुस्तक के मंत्र, पूजन-क्रम एवं कथाएँ शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं। किसी बड़े अनुष्ठान को करने से पूर्व योग्य गुरुजी का मार्गदर्शन लेना उचित है। पौराणिक फलश्रुतियाँ श्रद्धा और परंपरा का अंग हैं।
दीपक का महत्त्व, नित्य पूजन, कार्तिक दीपदान एवं लक्षवर्तिका व्रत-विधि

भक्तों के हृदय में श्रद्धा एवं भक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करने वाला संकलन
विशेष : चारों पीठों के शंकराचार्यों की पारम्परिक जगद्गुरु विरुदावली स्तुति
एक ही ख़रीद में दो फ़ाइलें मिलती हैं — पढ़ने और प्रिंट के लिए 105 पृष्ठ की PDF, और मोबाइल तथा ई-रीडर के छोटे पर्दे के अनुसार ढलने वाली EPUB।
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हाँ। गंगा-तट पर न हों, तो गंगाजल से भरे कलश को माँ गंगा का प्रतीक मानकर उसी विधि से पूजन करें। समय कम हो, तो परिशिष्ट का एक-पृष्ठीय संक्षिप्त पूजन-क्रम पर्याप्त है।
हाँ। अध्याय 8 में स्कन्दपुराण के अनुसार गंगा दशहरा की विधि, दशहरा-स्तोत्र और आज के समय में इसे मनाने का सरल मार्गदर्शन है।
पुस्तक हिंदी में है। मूल संस्कृत मंत्र, श्लोक और स्तोत्र उनके हिंदी अर्थ के साथ दिए गए हैं।
हाँ। इसी पृष्ठ पर भूमिका, अनुक्रमणिका, मंगलाचरण और पूरे अध्याय 1 वाला 20 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना उपलब्ध है।
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