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गंगा पूजन बोधिका

माँ गंगा का माहात्म्य, सम्पूर्ण पूजन-विधि, स्तोत्र एवं आरती

गंगा-तट पर हों या घर में गंगाजल के कलश के सम्मुख — पवित्रीकरण से विसर्जन तक माँ गंगा का पूरा पूजन, शुद्ध मंत्र और सरल अर्थ सहित, एक ही पुस्तक में।

लेखक श्री शिवबोध जी · प्रकाशक ShivBodh Trust

गंगा पूजन बोधिका — माँ गंगा का माहात्म्य, सम्पूर्ण पूजन-विधि, स्तोत्र एवं आरती
  • 105पृष्ठ
  • PDF + EPUBदोनों फ़ाइलें
  • हिंदीमूल संस्कृत सहित
  • 8अध्याय + परिशिष्ट

माँ गंगा के पूजन की सरल और क्रमबद्ध पुस्तिका

हिमालय की बर्फीली चोटियों से उतरकर सागर में मिलने तक गंगा की जो अविरल धारा बहती है, वह भारत के लोक-मन के लिए केवल एक नदी नहीं है। वह जीवन है, आस्था है और मोक्ष का द्वार है। जन्म के संस्कार से लेकर अंतिम यात्रा तक गंगाजल साथ रहता है।

सामान्य श्रद्धालु के पास ऐसी कोई सरल और क्रमबद्ध पुस्तिका नहीं थी, जिसमें गंगा-पूजन की पूरी विधि शुद्ध मंत्रों और सरल अर्थ के साथ एक ही स्थान पर मिल जाए। यह पुस्तक वही कमी पूरी करती है। इस द्वितीय संस्करण में सभी पौराणिक श्लोक स्कन्दपुराण, विष्णुपुराण, मत्स्यपुराण, नारदपुराण और ब्रह्मवैवर्तपुराण से मिलाकर शुद्ध किए गए हैं, और गंगा दशहरा का अध्याय नया जोड़ा गया है।

यह पुस्तक किसके लिए है?

  • वे श्रद्धालु, जो गंगा-तट पर स्वयं माँ गंगा का पूजन करना चाहते हैं।
  • वे परिवार, जो घर में गंगाजल के कलश को माँ गंगा का प्रतीक मानकर पूजन करते हैं।
  • गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी, कार्तिक पूर्णिमा या मकर संक्रान्ति पर पूरा विधान करने वाले साधक।
  • पुरोहित, अध्येता और वे पाठक, जो गंगा-महिमा को उसके मूल ग्रन्थों के साथ पढ़ना चाहते हैं।

आठ अध्याय, एक सम्पूर्ण पूजन-क्रम

गंगा-माहात्म्य

पूजन से पहले माँ गंगा को जानें — अवतरण की कथा और शास्त्रों के चुने हुए श्लोक।

  1. अध्याय 1

    गंगा-माहात्म्य : अवतरण की कथा

    त्रिपथगा और विष्णुपदी, राजा सगर और भगीरथ की तपस्या, गंगावतरण का संदेश और वेद-पुराणों के श्लोक।

सम्पूर्ण पूजन-क्रम

पवित्रीकरण से विसर्जन तक — हर मंत्र के साथ उसका अर्थ, ताकि मंत्र बोलते समय मन भी उसके भाव में रहे।

  1. अध्याय 2

    पूजन की पूर्व-तैयारी एवं प्रारम्भिक कर्म

    पवित्रीकरण, आचमन, आसन-शुद्धि, दीप-प्रज्वलन, शंख-घण्टा पूजन, स्वस्तिवाचन और संकल्प।

  2. अध्याय 3

    श्री गणेश-गौरी पूजन

    ध्यान और आवाहन से आरती और प्रार्थना तक — षोडशोपचार विधि।

  3. अध्याय 4

    कलश-स्थापन एवं वरुण-पूजन

    भूमि-पूजन, धान्य-स्थापन, कलश में द्रव्य, वरुण और तीर्थों का आवाहन।

  4. अध्याय 5

    माता गंगा का षोडशोपचार पूजन

    ध्यान, आवाहन, स्नान, अङ्ग-पूजा, नैवेद्य, आरती, मन्त्र-पुष्पाञ्जलि, क्षमा-प्रार्थना और विसर्जन।

नामावली, स्तोत्र एवं पर्व

  1. अध्याय 6

    श्री गंगा अष्टोत्तरशतनामावली एवं आरती

    माँ गंगा के 108 नाम और श्री गंगा जी की आरती।

  2. अध्याय 7

    स्तोत्र-संग्रह

    ब्रह्मवैवर्तपुराण का गंगा-ध्यान और विष्णुपदी-स्तोत्र, आदि शंकराचार्य का गंगास्तोत्र, तुलसीदास जी का गंगा-पद — अर्थ सहित।

  3. अध्याय 8

    गंगा दशहरा : विधि एवं स्तोत्र

    स्कन्दपुराण के अनुसार दशहरा की शास्त्रीय विधि, दशहरा-स्तोत्र और आज के समय में इसे कैसे मनाएँ।

परिशिष्ट एवं सन्दर्भ

  1. सामग्री, संक्षिप्त पूजन एवं पर्व

    पूजन-सामग्री की एकत्र सूची, घर के लिए एक-पृष्ठीय संक्षिप्त गंगा-पूजन और गंगा से जुड़े प्रमुख पर्व।

  2. सन्दर्भ-ग्रन्थ

    पुस्तक में प्रयुक्त पुराणों, वेद-संहिताओं और स्रोतों की सूची।

माँ गंगा की कृपा से यह छोटा-सा प्रयास आपके घर और मन तक पहुँचे, और उनकी निर्मलता हम सबके जीवन में बहती रहे।

— भूमिका से

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भूमिका, अनुक्रमणिका, मंगलाचरण और पूरा अध्याय 1 — 20 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना (PDF)।

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श्री शिवबोध जी

इस पुस्तक के लेखक

ShivBodh Trust

वह संस्था जिसके माध्यम से यह पुस्तक ई-पुस्तक के रूप में उपलब्ध है

द्वितीय संस्करण (संशोधित ई-पुस्तक), अक्टूबर 2026 · भाषा : संस्कृत एवं हिंदी

इस पुस्तक के मंत्र, पूजन-क्रम एवं कथाएँ शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं। किसी बड़े अनुष्ठान को करने से पूर्व योग्य गुरुजी का मार्गदर्शन लेना उचित है। पौराणिक फलश्रुतियाँ श्रद्धा और परंपरा का अंग हैं।

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फ़ाइलें कितनी बार डाउनलोड कर सकते हैं?

प्रत्येक फ़ाइल ख़रीद से 365 दिन के भीतर 5 बार डाउनलोड की जा सकती है। डाउनलोड के बाद फ़ाइलें अपने डिवाइस में सुरक्षित रख लें।

क्या इस पुस्तक से घर पर गंगा-पूजन कर सकते हैं?

हाँ। गंगा-तट पर न हों, तो गंगाजल से भरे कलश को माँ गंगा का प्रतीक मानकर उसी विधि से पूजन करें। समय कम हो, तो परिशिष्ट का एक-पृष्ठीय संक्षिप्त पूजन-क्रम पर्याप्त है।

क्या इसमें गंगा दशहरा की विधि है?

हाँ। अध्याय 8 में स्कन्दपुराण के अनुसार गंगा दशहरा की विधि, दशहरा-स्तोत्र और आज के समय में इसे मनाने का सरल मार्गदर्शन है।

पुस्तक किस भाषा में है?

पुस्तक हिंदी में है। मूल संस्कृत मंत्र, श्लोक और स्तोत्र उनके हिंदी अर्थ के साथ दिए गए हैं।

क्या ख़रीदने से पहले कुछ भाग पढ़ सकते हैं?

हाँ। इसी पृष्ठ पर भूमिका, अनुक्रमणिका, मंगलाचरण और पूरे अध्याय 1 वाला 20 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना उपलब्ध है।

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