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श्रीशिवगीता

भगवान शिव और श्रीराम का संवाद · 16 अध्याय · 762 श्लोक

संकलनकर्ता — श्री शिवबोध जी · प्रकाशक — शिवबोध ट्रस्ट

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॥ ॐ नमः शिवाय ॥

श्रीशिवगीता

भगवान शिव और श्रीराम का संवाद

16 अध्याय · 762 श्लोक · मूल संस्कृत पाठ

संकलनकर्ता
श्री शिवबोध जी
प्रकाशक
शिवबोध ट्रस्ट, काशी
प्रथम अध्याय से पढ़ें →

अनुक्रमणिका

  1. 1 प्रथमोऽध्यायः उपोद्घात — शिवगीता की महिमा और परम्परा 36 श्लोक
  2. 2 द्वितीयोऽध्यायः — वैराग्योपदेशः सीता-वियोग में श्रीराम को महर्षि अगस्त्य का वैराग्य-उपदेश 43 श्लोक
  3. 3 तृतीयोऽध्यायः — विरजादीक्षानिरूपणम् विरजा दीक्षा और पाशुपत व्रत की विधि 37 श्लोक
  4. 4 चतुर्थोऽध्यायः — शिवप्रादुर्भावः श्रीराम के सम्मुख भगवान शिव का प्रकट होना 52 श्लोक
  5. 5 पञ्चमोऽध्यायः — रामाय वरप्रदानम् श्रीराम को वरदान और दिव्य अस्त्र की प्राप्ति 38 श्लोक
  6. 6 षष्ठोऽध्यायः — विभूतियोगः भगवान शिव की विभूतियों का वर्णन 57 श्लोक
  7. 7 सप्तमोऽध्यायः — विश्वरूपदर्शनम् श्रीराम को विश्वरूप का दर्शन 45 श्लोक
  8. 8 अष्टमोऽध्यायः पाञ्चभौतिक देह की उत्पत्ति और गर्भ-विकास 69 श्लोक
  9. 9 नवमोऽध्यायः — शरीरनिरूपणम् शरीर, नाड़ियाँ और प्राणों का निरूपण 51 श्लोक
  10. 10 दशमोऽध्यायः जीव का स्वरूप और हृदय में उसका स्थान 58 श्लोक
  11. 11 एकादशोऽध्यायः मृत्यु के बाद जीव की गति और लोकान्तर 45 श्लोक
  12. 12 द्वादशोऽध्यायः — उपासनाप्रपञ्चयोगः उपासना की विधि, देश और काल 41 श्लोक
  13. 13 त्रयोदशोऽध्यायः — मोक्षयोगः मोक्ष का स्वरूप — श्रवण, मनन और निदिध्यासन 38 श्लोक
  14. 14 चतुर्दशोऽध्यायः पञ्चकोश-विवेक और साक्षी आत्मा 44 श्लोक
  15. 15 पञ्चदशोऽध्यायः — भक्तियोगः भक्ति का स्वरूप और भस्म-धारण 39 श्लोक
  16. 16 षोडशोऽध्यायः मोक्ष-मार्ग के अधिकारी और फलश्रुति 69 श्लोक

श्रीशिवगीता क्या है

दण्डकारण्य में सीता-वियोग से व्याकुल श्रीराम को महर्षि अगस्त्य विरजा दीक्षा देते हैं; तब भगवान शिव प्रकट होकर उन्हें आत्मज्ञान, शरीर और जीव का स्वरूप, उपासना, भक्ति और मोक्ष का उपदेश देते हैं। सोलह अध्यायों का यह संवाद श्रीशिवगीता कहलाता है।

  • यह संस्करण श्री शिवबोध जी द्वारा संकलित और शिवबोध ट्रस्ट, काशी द्वारा प्रकाशित है — सभी 16 अध्यायों का सम्पूर्ण मूल संस्कृत पाठ, 762 श्लोक।
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