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दीप पूजन

दीपक का महत्त्व, नित्य पूजन, कार्तिक दीपदान एवं लक्षवर्तिका व्रत-विधि

दीप क्यों जलाते हैं? घी लें या तेल? कितनी बत्तियाँ हों? कार्तिक मास में दीपदान का क्या विधान है? — इन सभी प्रश्नों के उत्तर एक स्थान पर।

लेखक श्री शिवबोध जी · प्रकाशक ShivBodh Trust

दीप पूजन — दीपक का महत्त्व, नित्य पूजन, कार्तिक दीपदान एवं लक्षवर्तिका व्रत-विधि
  • 115पृष्ठ
  • PDF + EPUBदोनों फ़ाइलें
  • हिंदीमूल संस्कृत सहित
  • 10अध्याय + परिशिष्ट

दीप-उपासना की सरल, स्पष्ट और प्रामाणिक जानकारी

भारतीय घरों में दीपक सबसे परिचित पूजा-सामग्री है। संध्या होते ही तुलसी के पास, देवस्थान में या द्वार पर एक छोटा-सा दीप जलाना करोड़ों परिवारों की दिनचर्या है।

इस पुस्तक के दो लक्ष्य हैं। पहला, सामान्य श्रद्धालु को दीप-उपासना की सरल, स्पष्ट और प्रामाणिक जानकारी देना, जिससे वह घर में प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक दीप जला सके। दूसरा, गंभीर साधक के लिए श्री लक्षवर्तिका व्रत की पूजा-पद्धति और परंपरागत लक्षवर्तिका कथा को मूल संस्कृत, हिंदी अर्थ और आवश्यक टिप्पणियों सहित सुरक्षित रखना।

यह पुस्तक किसके लिए है?

  • वे गृहस्थ, जो प्रतिदिन घर में दीप जलाते हैं और इसका अर्थ तथा सही विधि जानना चाहते हैं।
  • वे श्रद्धालु, जो कार्तिक मास, दीपावली अथवा अन्य पर्वों पर दीपदान करते हैं।
  • वे साधक, जो गुरुजी के मार्गदर्शन में श्री लक्षवर्तिका व्रत और उसका उद्यापन करना चाहते हैं।
  • पुरोहित, अध्येता और वे सभी पाठक, जो दीप-परंपरा को उसके मूल ग्रंथों के साथ समझना चाहते हैं।

दस अध्याय, तीन खंड

खंड 1 · गृहस्थ के लिए

पहली बार पढ़ रहे हैं, तो यहीं से आरंभ करें। अध्याय 4 में दैनिक उपयोग की एक पृष्ठ की पूजा-पत्रिका है।

  1. अध्याय 1

    दीपक का आध्यात्मिक महत्त्व

    हम दीप क्यों जलाते हैं — प्रकाश, ज्ञान, एकाग्रता, भक्ति और दीप-ज्योति को प्रणाम।

  2. अध्याय 2

    दीपक, घी–तेल और बत्ती

    दीप-पात्र, घी या तेल, बत्ती का चयन, दीप का आसन, दिशा, स्थान और समय।

  3. अध्याय 3

    देवता और अवसर के अनुसार दीप

    देवता–दीप तालिका और अवसर के अनुसार दीप, संक्षेप में।

  4. अध्याय 4

    घर में नित्य दीप पूजन

    पवित्रीकरण, संकल्प, दीप-प्रज्वलन, दीप-प्रणाम, आरती और क्षमा-प्रार्थना — क्रमबद्ध सरल विधि।

  5. अध्याय 5

    दीपदान : अर्थ, स्थान, समय और प्रकार

    आरती, दीप-पूजन और दीपदान में अंतर; नदी-तट पर दीपदान की स्वच्छता एवं सुरक्षा।

खंड 2 · कार्तिक मास

कार्तिक के दीपदान, आकाशदीप, तुलसी-दीप, पितृ-दीप और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएँ।

  1. अध्याय 6

    कार्तिक मास का दीपदान

    पूरे मास का दीपदान, आकाशदीप, तुलसी-दीप, पितृ-दीप और दामोदर-पूजन।

  2. अध्याय 7

    दीपदान की पौराणिक महिमा

    चुनी हुई कथाएँ — दीप की लौ बढ़ाने वाला चूहा, आकाशदीप की कथा और अन्य।

खंड 3 · श्री लक्षवर्तिका व्रत

यह विस्तृत अनुष्ठान है; इसे गुरुजी के मार्गदर्शन में ही करें।

  1. अध्याय 8

    लक्षवर्तिका : परिचय, गणना एवं उद्यापन-क्रम

    लक्ष और सवा लाख, दशांश की गणना, प्रतिदिन हजार बत्तियाँ और उद्यापन एक दृष्टि में।

  2. अध्याय 9

    लक्षवर्तिका दीपदान : पूजा-विधि

    व्रत की पूरी पूजा-पद्धति, क्रम से।

  3. अध्याय 10

    श्री लक्षवर्तिका व्रत-कथा

    मूल संस्कृत श्लोक, हिंदी भावार्थ और टिप्पणियाँ।

परिशिष्ट एवं सन्दर्भ

  1. परिशिष्ट

    सामग्री-सूचियाँ, मंत्र-संग्रह, आरती, क्षमा-प्रार्थना, प्रश्नोत्तर, शब्दावली और पुरानी माप-इकाइयाँ।

  2. सन्दर्भ-ग्रन्थ

    पुस्तक में प्रयुक्त ग्रन्थों और ऑनलाइन स्रोतों की सूची।

दीप की ज्योति हमें याद दिलाती है कि जो प्रकाश बाहर जलता है, वही प्रकाश प्रत्येक प्राणी के भीतर भी है।

— भूमिका से

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भूमिका, अनुक्रमणिका और पूरा अध्याय 1 — 17 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना (PDF)।

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श्री शिवबोध जी

इस पुस्तक के लेखक

ShivBodh Trust

वह संस्था जिसके माध्यम से यह पुस्तक ई-पुस्तक के रूप में उपलब्ध है

प्रथम संस्करण (ई-पुस्तक), 2026 · भाषा : संस्कृत एवं हिंदी

इस पुस्तक में दिए गए मंत्र, विधि एवं कथा शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं। किसी भी अनुष्ठान को करने से पूर्व योग्य गुरुजी का मार्गदर्शन लेना उचित है। पौराणिक फलश्रुतियाँ श्रद्धा और परंपरा का अंग हैं; इन्हें चिकित्सा, आर्थिक अथवा अन्य व्यावसायिक परामर्श का विकल्प न मानें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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क्या मुद्रित (प्रिंटेड) प्रति मिलती है?

अभी यह पुस्तक केवल ई-पुस्तक (PDF + EPUB) के रूप में उपलब्ध है।

पुस्तक किस भाषा में है?

पुस्तक हिंदी में है। मूल संस्कृत श्लोक और मंत्र उनके हिंदी अनुवाद या भावार्थ के साथ दिए गए हैं।

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हाँ। इसी पृष्ठ पर भूमिका, अनुक्रमणिका और पूरे अध्याय 1 वाला 17 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना उपलब्ध है।

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