गंगा पूजन बोधिका
माँ गंगा का माहात्म्य, सम्पूर्ण पूजन-विधि, स्तोत्र एवं आरती
दीपक का महत्त्व, नित्य पूजन, कार्तिक दीपदान एवं लक्षवर्तिका व्रत-विधि
दीप क्यों जलाते हैं? घी लें या तेल? कितनी बत्तियाँ हों? कार्तिक मास में दीपदान का क्या विधान है? — इन सभी प्रश्नों के उत्तर एक स्थान पर।
लेखक श्री शिवबोध जी · प्रकाशक ShivBodh Trust

भारतीय घरों में दीपक सबसे परिचित पूजा-सामग्री है। संध्या होते ही तुलसी के पास, देवस्थान में या द्वार पर एक छोटा-सा दीप जलाना करोड़ों परिवारों की दिनचर्या है।
इस पुस्तक के दो लक्ष्य हैं। पहला, सामान्य श्रद्धालु को दीप-उपासना की सरल, स्पष्ट और प्रामाणिक जानकारी देना, जिससे वह घर में प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक दीप जला सके। दूसरा, गंभीर साधक के लिए श्री लक्षवर्तिका व्रत की पूजा-पद्धति और परंपरागत लक्षवर्तिका कथा को मूल संस्कृत, हिंदी अर्थ और आवश्यक टिप्पणियों सहित सुरक्षित रखना।
पहली बार पढ़ रहे हैं, तो यहीं से आरंभ करें। अध्याय 4 में दैनिक उपयोग की एक पृष्ठ की पूजा-पत्रिका है।
हम दीप क्यों जलाते हैं — प्रकाश, ज्ञान, एकाग्रता, भक्ति और दीप-ज्योति को प्रणाम।
दीप-पात्र, घी या तेल, बत्ती का चयन, दीप का आसन, दिशा, स्थान और समय।
देवता–दीप तालिका और अवसर के अनुसार दीप, संक्षेप में।
पवित्रीकरण, संकल्प, दीप-प्रज्वलन, दीप-प्रणाम, आरती और क्षमा-प्रार्थना — क्रमबद्ध सरल विधि।
आरती, दीप-पूजन और दीपदान में अंतर; नदी-तट पर दीपदान की स्वच्छता एवं सुरक्षा।
कार्तिक के दीपदान, आकाशदीप, तुलसी-दीप, पितृ-दीप और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएँ।
पूरे मास का दीपदान, आकाशदीप, तुलसी-दीप, पितृ-दीप और दामोदर-पूजन।
चुनी हुई कथाएँ — दीप की लौ बढ़ाने वाला चूहा, आकाशदीप की कथा और अन्य।
यह विस्तृत अनुष्ठान है; इसे गुरुजी के मार्गदर्शन में ही करें।
लक्ष और सवा लाख, दशांश की गणना, प्रतिदिन हजार बत्तियाँ और उद्यापन एक दृष्टि में।
व्रत की पूरी पूजा-पद्धति, क्रम से।
मूल संस्कृत श्लोक, हिंदी भावार्थ और टिप्पणियाँ।
सामग्री-सूचियाँ, मंत्र-संग्रह, आरती, क्षमा-प्रार्थना, प्रश्नोत्तर, शब्दावली और पुरानी माप-इकाइयाँ।
पुस्तक में प्रयुक्त ग्रन्थों और ऑनलाइन स्रोतों की सूची।
दीप की ज्योति हमें याद दिलाती है कि जो प्रकाश बाहर जलता है, वही प्रकाश प्रत्येक प्राणी के भीतर भी है।
भूमिका, अनुक्रमणिका और पूरा अध्याय 1 — 17 पृष्ठ का मुफ़्त नमूना (PDF)।
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वह संस्था जिसके माध्यम से यह पुस्तक ई-पुस्तक के रूप में उपलब्ध है
इस पुस्तक में दिए गए मंत्र, विधि एवं कथा शास्त्रीय परंपरा पर आधारित हैं। किसी भी अनुष्ठान को करने से पूर्व योग्य गुरुजी का मार्गदर्शन लेना उचित है। पौराणिक फलश्रुतियाँ श्रद्धा और परंपरा का अंग हैं; इन्हें चिकित्सा, आर्थिक अथवा अन्य व्यावसायिक परामर्श का विकल्प न मानें।
माँ गंगा का माहात्म्य, सम्पूर्ण पूजन-विधि, स्तोत्र एवं आरती

भक्तों के हृदय में श्रद्धा एवं भक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करने वाला संकलन
विशेष : चारों पीठों के शंकराचार्यों की पारम्परिक जगद्गुरु विरुदावली स्तुति
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